Agara UP: रोजेदार ने नाले में उतरकर बचाई गाय की जान

Dhara Lakshya samachar pvt Ltd

आगरा =देशभर में फिरका परस्त लोग मंदिर मस्जिद दरगाह मूर्ति धर्म ब मजहब के नाम पर फिजा खराब करने का प्रयास करते रहते हैं इस तरह की खबर आए दिन समाचार पत्रों की सुर्खियां बनती हैं वही मोहब्बत की नगरी आगरा में आए दिन आपसी भाईचारे की मिसाल देखने को मिलती हैं ताजा मामला ताज नगरी आगरा के शाहगंज क्षेत्र के अजम पाड़ा का है।

जहां एक मुस्लिम युवक ने रोजे की हालत में 7 फीट गहरे नाले में उतरकर गाय की जान बचाकर आपसी भाईचारे की मिसाल कायम की है जिस समाज में गाय को माता माना जाता है वह नाले में उतरने को तैयार नहीं हुए जिस समाज पर गौ मांस खाने का आरोप लगाया जाता है उस समाज का एक सक्स रोजे की हालत में गाय को बचाने के लिए नाले में उतरता है क्षेत्र में अधिकतर लोगों की जुबान पर रोजेदार मुस्लिम युवक के चर्चे हैं

प्राप्त जानकारी के अनुसार अजम पाड़ा स्थित नाले में एक गाय गिर गई थी जिसे निकालने के लिए आसपास के लोगों तथा राहगीर होने काफी प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली तो पुलिस को सूचना दी गई जिसको निकालने के लिए नगर निगम पुलिस फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची थी।

लेकिन फायर ब्रिगेड कर्मियों को एक ऐसे कम वजन के हल्के युवक की आवश्यकता थी फायर ब्रिगेड कर्मियों ने वहां मौजूद अनेकों लोगों से नाले में उतरकर गाय के रस्सा बांधने को कहा जिससे गाय को मशीन के माध्यम से ऊपर खींचा जा सके लेकिन कोई भी व्यक्ति गंदे नाले में उतरने को तैयार नहीं हुआ तभी वहां से गुजर रहे मुस्लिम युवक गुल चमन शेरवानी 7 फीट गहरे नाले में उतरने को तैयार हो गए ।

और उन्होंने नाले में उतरकर गाय को रस्सा बांध दिया इस दौरान शेरवानी के कमर तक कीचड़ थी जिसके चलते शेरवानी के कपड़े शरीर कीचड़ से काफी गंदा हो गया गाय के निकलने के बाद रोज अफ़तार के लिए आजान हो गई वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने शेरवानी की सराहना की तो शेरवानी ने बताया कि वह रमजान से है और अजान हो चुकी है उसे घर पर जाकर कपड़े बदलने होंगे तभी वह रमजान आफतार करके नमाज अदा कर सकेगा।

यह सुनकर वहां मौजूद पुलिसकर्मी व अन्य लोगों को काफी आश्चर्य हुआ लोग सोचने पर मजबूर हो गए कि जिस समाज पर गाय को अपना निवाला बनाने का आरोप है इस समाज का एक बसींदा किस तरह रोजे की हालत में गाय को बचाने के लिए 7 फीट गहरे नाले में उतरता है।

जबकि गाय को माता कहने वाले लोगों की भीड़ तमाशा बिन बनी देखती रही शेरवानी ने वहां मौजूद लोगों से कहा कि उसका मजहब और वतन आमने-सामने नहीं है एक साथ खड़े हैं यह प्रकरण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है

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