Merath UP: कानून बनाम तुगलकी फरमान.. UP पुलिस की DSP सौम्या अस्थाना के कथित आदेश को लेकर बड़ा सवाल

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

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मेरठ(यूपी) : मेरे किसी भी थाने के अंदर अगर पत्रकार ने वीडियोग्राफी की, तो तुरंत मुकदमा दर्ज होगा!लेकिन सवाल यह है-क्या ऐसा फरमान कानून से ऊपर है.?कानूनी हकीकत अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता Press Freedom का मूल आधार।पत्रकार कोई अपराधी नहीं। वे सार्वजनिक हित में सूचना संकलन करते हैं, और थाना एक सार्वजनिक स्थान है, कोई निजी परिसर नहीं।सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के कई फैसले कहते हैं,

कि प्रेस को बिना वैध कारण रोका नहीं जा सकता।बिना कानून बताए सिर्फ आदेश देना मनमानी है।Fir तभी दर्ज हो सकती है जब कानून में स्पष्ट अपराध हो,सवाल सिर्फ पत्रकारों का नहीं है।आज कैमरा रोका गया है,कल आवाज़ रोकी जाएगी।कानून का राज फरमान से नहीं,संविधान से चलता है।

पत्रकार का कैमरा अपराध नहीं है,कानून से ऊपर कोई नहीं,न वर्दी, न पद।अभिव्यक्ति की आज़ादी संविधान ने दी है, किसी अफसर के मौखिक आदेश ने नहीं।

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