राही विकास समिति के शानदार कवि सम्मेलन में झूम उठे दर्शक

मैं तो जला हूं, किसी को जलाया तो नहीं है, मैं तो जला बस, रोशनी के लिए——-अध्यक्ष रवीन्द्र कुशवाहा

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

प्रयागराज। राही विकास समिति द्वारा स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में एक कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन सामुदायिक विवाह घर ककरहा घाट मीरापुर प्रयाग शवराज में आयोजित किया गया जिसमें मुख्य अतिथि श्री श्री 1008 आचार्य स्वामी कौशल्यानंद गिरी, टीना मां एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता ललित कला अकादमी के सदस्य विख्यात कवि कलाकार रवीन्द्र कुशवाहा ने की और संरक्षक दिनेश सिंह एवं विशिष्ट अतिथि मधु श्रीवास्तव अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक मानवाधिकार संरक्षण जिला अध्यक्ष मौजूद रहीं व राजेश खरे पूर्व कार्यकारिणी अध्यक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन उपस्थित रहे इस अवसर पर पौधारोपण एवं कविता पाठ का आयोजन हुआ।

संस्था के अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार श्रीवास्तव व सच्ची मधुसूदन निषाद ने मुख्य अतिथि एवं सभी अतिथियों का माल्यार्पण अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह से स्वागत किया। कवि सम्मेलन का संचालन पंडित राकेश मालवीय मुस्कान ने किया और कवि सम्मेलन की शुरुआत अन्नपूर्णा मालवीय के सरस्वती वंदना के साथ शुरुआत हुई, उजड़े दयार को भी वो आबाद लिख गया मरने का एक नया वह अंदाज लिख गया मनमोहन सिंह तन्हा ने सुनाया, यह वह सरजमी जिसकी दुनिया दीवानी है।

जिसमें जिसका गुलशन है वादियों में पानी है शंभू नाथ श्रीवास्तव ने शानदार कविता पढ़ी, ऐसा दे हुनर की ग़म खुशी से उछल पड़े जो मैं गुदगुदाऊ तो पत्थर भी हंस पड़े डॉ योगेंद्र कुमार मिश्रा विश्वबंधु ने पढ़ तालिया बटोरी, अपनी कविता धर्म सनातन हो शिला सर्व धर्म आधार मिले जगदीश कौर ने शानदार कविता पड़ीं, जगरानी मां का लाल था जिसने तुम्हें यह सूरत दिया शरत चंद्र श्रीवास्तव सरल ने पढ़ी, फांसी के फंदो को चूमा उनकी याद करें भारत मां की जय बोले मिलकर फरियाद करें पंडित राकेश मालवीय मुस्कान की रचना रही।

अध्यक्षता कर रहे कवि रवीन्द्र कुशवाहा ने सुनाया मैं तो जला हूं किसी को जलाया तो नहीं है मैं तो जला बस‌ रोशनी के लिए सुना तालियां बटोरी अन्य कवियों में झांसी से राजेश तिवारी मक्खन, प्रयागराज से इम्नियाज अहमद ग़ाजी, अजय मालवीय, सुभाषिनी, शैलेंद्र जय, शिवम त्रिपाठी आदि सभी कवियों की शानदार रचनाएं सुन दर्शकदीर्घा तालियों की गड़गड़ाहट से भर उठा।

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