तहसील प्रशासन के कथित निर्देशों के बावजूद कार्रवाई नहीं, फिर ‘उच्चाधिकारियों की अनुमति’ का आधार क्या?
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
बाराबंकी। रोजगार और रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को स्वरोजगार उपलब्ध कराना सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। इस उद्देश्य पर किसी को आपत्ति नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि क्या रोजगार की व्यवस्था सार्वजनिक स्मृति वाटिका, महिला सार्वजनिक शौचालय और तहसील परिसर की सुव्यवस्था व सौंदर्य को प्रभावित करके ही की जाएगी?
तहसील रामसनेहीघाट के सामने स्थित स्वर्गीय हरिशंकर सिंह तहसीलदार स्मृति वाटिका के सामने रखी गई चार गुमटियों को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर नगर पंचायत की ओर से कुछ माध्यमों में इसे उच्चाधिकारियों के निर्देशों के अनुरूप स्थापित वेंडिंग जोन बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर लगातार यह जानकारी सामने आती रही है कि उपजिलाधिकारी (एसडीएम) एवं तहसील प्रशासन द्वारा इन गुमटियों को पार्क क्षेत्र से हटाने अथवा किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए थे।
हटाने के निर्देश थे तो अनुमति किसकी?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा प्रश्न बन गया है। यदि पार्क के सामने गुमटियां स्थापित करना सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति और प्रशासनिक निर्णय के अनुरूप था, तो फिर इन्हें हटाने या अन्यत्र स्थापित करने के निर्देश क्यों दिए गए? और यदि वास्तव में एसडीएम व तहसीलदार ने हटाने के निर्देश दिए थे, तो उन पर अब तक अमल क्यों नहीं हुआ?
जनता जानना चाहती है कि आखिर एक ही मामले में दो अलग-अलग प्रशासनिक तस्वीरें क्यों सामने आ रही हैं।
विरोध रोजगार का नहीं, स्थान चयन का
नगर पंचायत वेंडिंग जोन को रोजगार और जनहित से जोड़कर प्रस्तुत कर रही है, जो अपने आप में महत्वपूर्ण विषय है। लेकिन जनहित केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। सार्वजनिक स्मृति स्थल, पार्क, महिला सार्वजनिक शौचालय और सरकारी परिसर की उपयोगिता तथा सौंदर्य भी समान रूप से जनहित का हिस्सा हैं।
इस मुद्दे को रोजगार विरोध का रूप देकर मूल प्रश्नों से ध्यान हटाना उचित नहीं माना जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या नगर पंचायत क्षेत्र में वेंडिंग जोन के लिए कोई अन्य उपयुक्त स्थान उपलब्ध नहीं था? यदि उपलब्ध था, तो सार्वजनिक स्मृति वाटिका और महिला शौचालय के समीप स्थित स्थान का ही चयन क्यों किया गया?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान को वर्षों से व्यवस्थित और सुंदर बनाए रखने का प्रयास किया गया, वहीं अब गुमटियों के कारण पार्क की दृश्यता और आसपास की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में केवल बयान जारी करने के बजाय प्रशासन को स्थलीय निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब प्रशासन दे स्पष्ट जवाब
पूरा मामला अब स्पष्ट प्रशासनिक उत्तर की मांग कर रहा है। नगर पंचायत सार्वजनिक रूप से बताए कि पार्क के सामने गुमटियां स्थापित करने की अनुमति किस सक्षम अधिकारी के आदेश पर और किस लिखित स्वीकृति के आधार पर दी गई।
यदि उपजिलाधिकारी अथवा तहसील प्रशासन की ओर से इन्हें हटाने के निर्देश दिए गए थे, तो उन आदेशों का पालन अब तक क्यों नहीं कराया गया? जनता के बीच फैले भ्रम को दूर करने के लिए संबंधित अधिकारी स्वयं स्थिति स्पष्ट करें और रोजगार, जनहित तथा सार्वजनिक सुविधाओं के बीच संतुलित समाधान प्रस्तुत करें।
पत्रकारिता का दायित्व किसी रोजगार योजना का विरोध करना नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े निर्णयों पर सवाल उठाकर जवाबदेही सुनिश्चित करना है। सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
अब निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है, क्योंकि मामला केवल चार गुमटियों का नहीं, बल्कि प्रशासनिक निर्देशों की विश्वसनीयता और सार्वजनिक जनहित से भी जुड़ा हुआ है।
