रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
महराजगंज, रायबरेली। क्षेत्र में नैय्या नाले का जलस्तर घटने के साथ ही तटीय गांवों में जंगली जानवरों की आमद बढ़ गई है। मंगलवार देर रात एक पागल सियार ने अतरेहटा क्षेत्र के कई गांवों में जमकर आतंक मचाया। सो रहे लोगों पर हमला कर उसने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों समेत एक दर्जन से अधिक लोगों को घायल कर दिया। सियार के हमलों से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और ग्रामीण रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार रात करीब दो बजे से नैय्या नाले के किनारे बसे पूरे सधई, छोटी गढ़ी, बड़ी गढ़ी और चुन्नू का पुरवा गांव में पागल सियार ने ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। गढ़ी गांव में चारपाई पर सो रहे शिवकुमार (35), प्रिंस (5), रामरती (65), फूलमती (60), सुरेश (35) और सुमित (10) को सियार ने काटकर घायल कर दिया। वहीं सधई का पुरवा में सुखलाल के दो पुत्रों पर भी हमला किया गया। नगर पंचायत क्षेत्र के चुन्नू का पुरवा में एक युवक और दो पशु भी सियार के हमले का शिकार बने।
ग्रामीणों के मुताबिक सियार इतना हिंसक था कि उसने इंसानों के साथ-साथ पशुओं को भी नहीं छोड़ा और भैंस के दो बच्चों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। अचानक हुए हमलों से गांवों में अफरा-तफरी मच गई। घायल लोगों को एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां सभी को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाकर उपचार किया गया।ग्रामीणों का कहना है कि नाले का पानी कम होने के बाद जंगली जानवर आबादी की ओर रुख कर रहे हैं,
जिससे खेतों और पशुशालाओं तक जाना भी खतरे से खाली नहीं है। लोगों ने आरोप लगाया कि लगातार हमलों के बावजूद वन विभाग की टीम अब तक मौके पर नहीं पहुंची है। सियार अभी भी आसपास के इलाकों में घूमता देखा जा रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों में सबसे ज्यादा भय व्याप्त है।
गांवों में बढ़ते खौफ के बीच ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल कार्रवाई कर पागल सियार को पकड़ने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक सियार को पकड़ा नहीं जाता, तब तक ग्रामीणों की जान पर खतरा बना रहेगा।
