विश्वकर्मा सम्मान समारोह में कारीगरों को सम्मान व टूलकिट वितरित, आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर।
रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
रायबरेली। प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित विश्वकर्मा सम्मान समारोह में कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का निर्माता बताते हुए विश्वकर्मा समाज की पारंपरिक कला और हुनर को देश की सांस्कृतिक एवं व्यापारिक पहचान बताया। उन्होंने कहा कि गांवों में जन्म से लेकर मृत्यु तक विभिन्न पारंपरिक ट्रेडों से जुड़े कारीगर समाज के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।मंत्री ने कहा कि कोई सिलाई-बुनाई का कार्य करता है तो कोई लोहे के औजार, फावड़े, कुदाल, कुल्हाड़ी आदि बनाने का काम करता है।
मिट्टी के कुल्हड़, घड़े और अन्य उपयोगी वस्तुएं बनाने वाले कारीगर भी हमारी समृद्ध परंपरा का हिस्सा हैं। यह हुनर पीढ़ियों से आगे बढ़ता आया है और भारत की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच है कि इन पारंपरिक कारीगरों को केवल सम्मान तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाया जाए। सरकार की योजनाओं के माध्यम से कारीगरों को बैंकों से ऋण, सब्सिडी और विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
मंत्री ने समारोह में वितरित की जा रही टूलकिट का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए उपकरण कारीगरों के व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। इससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, आय में वृद्धि होगी और वे अपने परिवार का बेहतर जीवन-यापन कर सकेंगे।
मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार ऐसे हुनरमंद लोगों को चिन्हित कर उनके लिए योजनाएं चला रही है। सरकार का उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों को आधुनिक संसाधनों से जोड़कर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि यही प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
