लोकगीतों की गूंज के बीच गांव-गांव पहुंचा जनसंवाद, गीतिका द्विवेदी ने महिलाओं से किया आत्मीय संवाद

बैसवारे की ‘गउनई’ लोक परंपरा के बीच सुधा द्विवेदी के लिए जनसंपर्क — महिलाओं ने व्यवहार और जनसरोकारों की सराहना की

रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

रायबरेली। जनपद के ग्रामीण अंचल में क्षेत्र भ्रमण के दौरान लोक संस्कृति और पारंपरिक लोकगीतों की जीवंत छटा देखने को मिली। बैसवारे की लोक परंपरा में विशेष महत्व रखने वाले ‘गउनई’ लोकगीतों की मधुर गूंज के बीच महिलाओं ने मांगलिक एवं शुभ अवसरों से जुड़ी पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति की। इस दौरान गीतिका द्विवेदी ने महिलाओं के बीच बैठकर लोकगीतों का आनंद लिया और उनसे आत्मीय संवाद किया।182-सरेनी विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र में हुए इस जनसंपर्क के दौरान गीतिका द्विवेदी ने अपनी मां समाजसेविका सुधा द्विवेदी के लिए भी लोगों से संवाद किया।

महिलाओं ने सुधा द्विवेदी के सहज व्यवहार, लोगों के बीच उनकी मौजूदगी और सामाजिक सरोकारों की चर्चा करते हुए उनसे जुड़ी अपनी अपेक्षाएं साझा कीं।

गीतिका द्विवेदी ने कहा कि “गांव की मिट्टी में रची-बसी लोक संस्कृति हमारी पहचान है। इन पारंपरिक लोकगीतों को महिलाओं के बीच बैठकर सुनना केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ने का अनुभव है।”उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता से मिल रहा स्नेह और सहयोग समाज के प्रति जिम्मेदारी को और मजबूत करता है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को भरोसा दिलाते हुए कहा कि यदि जनता सुधा द्विवेदी को क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर देती है,

तो जनता के बीच रहकर क्षेत्र की समस्याओं को समझने और विकास की दिशा में काम करने का निरंतर प्रयास किया जाएगा।लोक संस्कृति बनी जनसंवाद का माध्यम इस दौरान महिलाओं ने गांव की स्थानीय समस्याओं, क्षेत्र की आवश्यकताओं और भविष्य की अपेक्षाओं पर भी बातचीत की। गीतिका द्विवेदी ने कहा कि जनसंपर्क का उद्देश्य केवल लोगों से मिलना नहीं, बल्कि उनकी बात सुनना, उनकी भावनाओं को समझना और उनकी अपेक्षाओं को जानना भी है।

उन्होंने कहा कि गांव की महिलाओं के साथ बिताया गया यह समय उनके लिए विशेष रहा। लोकगीतों की परंपरा और महिलाओं के उत्साह ने ग्रामीण जीवन की सांस्कृतिक समृद्धि को सामने रखा।उन्होंने सभी ग्रामीणv महिलाओं एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “आप सभी का प्यार और सहयोग ही हमें समाज के लिए कुछ बेहतर करने की प्रेरणा देता है। यह आत्मीय संवाद और जनसंपर्क आगे भी निरंतर जारी रहेगा

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