मांगें पूरी न होने पर महराजगंज तहसील में शुरू हुआ बहिष्कार आंदोलन।
रिपोर्टर रोहित मिश्रा रायबरेली
धारा लक्ष्य समाचार पत्र
महराजगंज, रायबरेली। तहसील महराजगंज में राजस्व व्यवस्था पर असर डालने वाला बड़ा फैसला सामने आया है। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर तहसील क्षेत्र के लेखपालों ने मंगलवार से अतिरिक्त ग्राम सभाओं एवं अतिरिक्त हलकों का कार्य पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है। इस निर्णय के बाद दर्जनों गांवों में राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है।
लेखपाल संघ का कहना है कि शासन एवं राजस्व परिषद स्तर पर लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके विरोध में प्रदेश नेतृत्व ने अतिरिक्त हलकों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। इसी क्रम में उपशाखा तहसील महराजगंज द्वारा तहसीलदार को पत्र सौंपकर आंदोलन की जानकारी दी गई।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि अतिरिक्त क्षेत्रों का कार्य देख रहे लेखपालों ने संबंधित हलकों के बस्ते राजस्व निरीक्षक कार्यालय में जमा कर दिए हैं। अब इन अतिरिक्त क्षेत्रों से जुड़े किसी भी प्रकार के शासकीय कार्य का निष्पादन संबंधित लेखपालों द्वारा नहीं किया जाएगा।
बहिष्कार के दायरे में रसूलपुर-चुरुवा, उमरपुर, इचौली-मैनाहार कटरा, थुलेण्डी-बावन बुजुर्ग बल्ला, कसरावा, भैरमपुर, कुरी, गूढ़ा-अमावां, रैन, भवानीगढ़-बेडारू, खजुरो, बहादुरनगर, देहली, कुम्भी, जगदीशपुर, ओसाह, दौतरा-चंदापुर, मऊ-मोहम्मदाबाद कोटवा, मोन, पाराकला, पोखरनी, जमुरावां, रीवा, बसंतपुर-सकतपुर, सीवन तथा बन्नावा सहित कई अतिरिक्त हलके शामिल हैं।
लेखपाल संघ ने तहसील प्रशासन से मांग की है कि जमा कराए गए बस्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजस्व निरीक्षक अधिष्ठान को आवश्यक निर्देश दिए जाएं। संगठन ने स्पष्ट किया है कि बहिष्कार अवधि में अतिरिक्त हलकों से जुड़े किसी भी राजस्व अथवा शासकीय कार्य की जिम्मेदारी संबंधित लेखपालों की नहीं होगी।
संघ के अनुसार यह निर्णय प्रांतीय कार्यवृत्त दिनांक 2 अगस्त 2026 एवं पत्रांक 004/2026 के अनुपालन में लिया गया है। संगठन ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि अतिरिक्त हलकों में राजस्व कार्य बाधित होते हैं या जनता को असुविधा का सामना करना पड़ता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन एवं राजस्व परिषद की होगी।
वहीं तहसील क्षेत्र में इस निर्णय को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और आम नागरिकों की निगाहें अब प्रशासन तथा शासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
