Dhara lakshya samachar
नई दिल्ली (न्यूज़ वार्ता): गणेश विसर्जन के 11वें वार्षिकोत्सव का आयोजन श्रद्धा, भक्ति, सामाजिक सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ किया गया। पिछले ग्यारह वर्षों से निरंतर चली आ रही इस अनूठी परंपरा के अंतर्गत भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं को पारंपरिक रूप से विसर्जित करने के स्थान पर श्रद्धालुओं को सम्मानपूर्वक भेंट किया जाता है।
इसी पर्यावरण-अनुकूल एवं श्रद्धापूर्ण परंपरा के अंतर्गत इस वर्ष साकेत कोर्ट की अधिवक्ता सीरत भट को भगवान श्री गणेश की प्रतिमा भेंट की गई।
अधिवक्ता सीरत भट ने इस अनूठी एवं पर्यावरण-अनुकूल परंपरा के बारे में जानकारी मिलने के बाद ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन एवं लॉयर्स फेडरेशन के अध्यक्ष श्री राजीव अग्निहोत्री से अनुरोध किया था कि इस वर्ष भगवान श्री गणेश की प्रतिमा उन्हें भेंट की जाए।
अपनी भावना व्यक्त करते हुए अधिवक्ता सीरत भट ने कहा कि जब उन्हें इस विशेष परंपरा के बारे में जानकारी मिली कि भगवान श्री गणेश की प्रतिमा का पारंपरिक विसर्जन करने के बजाय श्रद्धा और सम्मान के साथ उसे भक्त को भेंट किया जाता है, तो वह इस पहल से अत्यंत प्रभावित हुईं। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि इस वर्ष भगवान श्री गणेश की प्रतिमा प्राप्त करने का सौभाग्य उन्हें मिले।
उनके अनुरोध पर अधिवक्ता सुरेंद्र त्यागी के साथ विचार-विमर्श किया गया। चर्चा के उपरांत अधिवक्ता सीरत भट का नाम इस वर्ष भगवान श्री गणेश की प्रतिमा भेंट किए जाने के लिए स्वीकृत किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित अधिवक्ताओं ने कहा कि यह पहल धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ने का सुंदर प्रयास है। भारतीय संस्कृति में भगवान श्री गणेश को बुद्धि, विवेक, शुभारंभ, समृद्धि और मंगल के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। ऐसे में गणेश चतुर्थी जैसे पवित्र पर्व को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी के साथ मनाना समाज के लिए सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश प्रस्तुत करता है।
ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन एवं लॉयर्स फेडरेशन के अध्यक्ष श्री राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों से इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है। भगवान श्री गणेश की प्रतिमा को विसर्जन के स्थान पर सम्मानपूर्वक भक्त को भेंट करने की यह पहल श्रद्धा और प्रकृति संरक्षण के बीच संतुलन का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, सद्भाव और सामाजिक एकता का भी पर्व है। इस अवसर पर समाज के प्रत्येक वर्ग को पर्यावरण की रक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया।
अधिवक्ता सुरेंद्र त्यागी ने आगामी वर्ष श्री गणेश की प्रतिमा जिसे श्रद्धापूर्वक भेंट की जाएगी, उसके नाम की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भगवान श्री गणेश की प्रतिमा को विसर्जन के स्थान पर भक्त को भेंट करने की परंपरा केवल धार्मिक भावना का सम्मान नहीं करती, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता पैदा करने का भी माध्यम है। इस परंपरा को आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक रूप देने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान भगवान श्री गणेश से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, स्वास्थ्य, सफलता और सद्भाव की कामना की गई। उपस्थित अधिवक्ताओं ने ग्यारह वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को बहुत सराहा तथा एडवोकेट कपिल कौशिक के मुताबिक वकीलों द्वारा यह कदम इतिहास में अपना नाम दर्ज करा चूका है ।
कार्यक्रम में बहुत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे इनमे कुछ के नाम इस प्रकार है अधिवक्ता
बबीता अहलावत, , कमलेश कुमार, सी.पी. गुसाईं , हामिद अली विवेक वर्मा , राधा रानी , एन के शर्मा
कार्यक्रम का समापन भगवान श्री गणेश के आशीर्वाद, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और अधिवक्ता समुदाय की एकजुटता के संदेश के साथ हुआ।
