मदरसे जाते समय मौत बनकर गिरी जर्जर दीवार, सगे बहन-भाई समेत दो मासूमों की दर्दनाक मौत
चार साल पहले एक बेटे को खो चुका था परिवार, अब बहन-भाई की मौत से उजड़ गईं बची-खुची खुशियां
धारा लक्ष्य समाचार
रामसनेहीघाट, बाराबंकी।
रामसनेहीघाट क्षेत्र के ग्राम गुलचप्पा में गुरुवार सुबह एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। मदरसे जा रहे बच्चों पर अचानक एक जर्जर पक्की दीवार भरभराकर गिर पड़ी, जिससे सगे बहन-भाई समेत दो मासूमों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चे घायल हो गए। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम छा गया और पीड़ित परिवार के घर कोहराम मच गया।
जानकारी के अनुसार, 14 वर्षीय हाजरा बानो अपने 7 वर्षीय भाई हुजैफा का हाथ थामे रोज की तरह मदरसे जा रही थी। मां ने दोनों बच्चों के लिए पराठा और सब्जी का टिफिन तैयार किया था। उनके साथ गांव के तीन अन्य बच्चे भी थे। जैसे ही सभी बच्चे गांव के रास्ते से गुजर रहे थे, तभी सड़क किनारे खड़ी एक जर्जर पक्की दीवार अचानक भरभराकर उनके ऊपर गिर गई।
मलबे में दबे बच्चों की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर दौड़े और कड़ी मशक्कत के बाद सभी को बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल बच्चों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां हुजैफा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि हाजरा बानो ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही अंतिम सांस ली। हादसे में घायल तीन अन्य बच्चों का उपचार जारी है।
पहले एक बेटा खोया, अब बहन-भाई भी चले गए।
इस हादसे ने मुस्लिम परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। करीब चार वर्ष पहले बीमारी के कारण परिवार ने अपने पांच वर्षीय बेटे फैजान को खो दिया था। इसके बाद छोटे बेटे हुजैफा के दिल का ऑपरेशन कराकर उसे नई जिंदगी मिली थी। परिवार को उम्मीद थी कि अब जीवन सामान्य हो जाएगा, लेकिन गुरुवार की सुबह एक जर्जर दीवार ने उनकी सारी उम्मीदें भी मलबे में दफना दीं।
हादसे की सूचना मिलते ही मां बदहवास होकर बेहोश हो गईं। होश आने पर वह बार-बार अपने बच्चों का नाम लेकर विलाप करती रहीं। पिता मुस्लिम की सूनी आंखें और खामोशी उनके असहनीय दर्द को बयां कर रही थीं। गांव का हर व्यक्ति इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध है।

डीएम ने जताई संवेदना, तत्काल राहत के दिए निर्देश
जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उपजिलाधिकारी बृजेंद्र उपाध्याय से फोन पर पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार को तत्काल राहत उपलब्ध कराई जाए तथा शासन के सभी प्रावधानों के तहत हरसंभव सहायता सुनिश्चित की जाए।
नियमानुसार मिलेगी आठ लाख रुपये की आर्थिक सहायता
उपजिलाधिकारी बृजेंद्र उपाध्याय ने बताया कि दोनों मृतक बच्चों के परिजनों को आपदा राहत मद से कुल आठ लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही हादसे में घायल तीनों बच्चों के उपचार और नियमानुसार आर्थिक सहायता की भी व्यवस्था की जा रही है।
राज्यमंत्री सतीश शर्मा ने जताया शोक
प्रदेश के खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री सतीश शर्मा ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मासूम बच्चों की असमय मृत्यु अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने दिवंगत बच्चों की आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार को शासन की ओर से मिलने वाली सहायता शीघ्र उपलब्ध कराई जाए।
गांव में पसरा मातम
गुलचप्पा गांव में इस हादसे के बाद शोक की लहर दौड़ गई है। हर आंख नम है और हर जुबान पर यही सवाल है कि यदि जर्जर दीवार समय रहते हटवा दी गई होती, तो शायद दो मासूम जिंदगियां बचाई जा सकती थीं
