नजूल भूमि की कार्रवाई के साथ आम भूमि विवादों पर भी हो त्वरित सुनवाई

जनता का कहना—सभी मामलों में समान गति से कार्रवाई हो तो प्रशासन के प्रति बढ़ेगा भरोसा

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

जिला संवाददाता शफीक अहमद

सीतापुर। जिलाधिकारी के स्तर से जिले में नजूल भूमि की पहचान और उससे जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई शुरू होने के बाद अब आम लोगों की भूमि संबंधी शिकायतों को लेकर भी उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि व्यक्तिगत या स्थानीय रंजिश के चलते शिकायतों का इस्तेमाल एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए किया जा सकता है। ऐसे में प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच के बाद ही कार्रवाई किया जाना जरूरी है।

समाज के विभिन्न वर्गों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि जिस तरह नजूल भूमि से जुड़े मामलों में प्रशासन तेजी दिखा रहा है, उसी प्रकार आम जनमानस के वर्षों से लंबित भूमि विवादों, पैमाइश, कब्जे और सीमांकन संबंधी शिकायतों पर भी समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। इससे लोगों को न्याय मिलने के साथ राजस्व और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा।

लोगों का मानना है कि आम नागरिक की भूमि संबंधी शिकायतों पर त्वरित सुनवाई और निष्पक्ष कार्रवाई शासन की मंशा को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने का माध्यम बन सकती है। विशेष रूप से ऐसे मामलों में, जहां लोग लंबे समय से तहसील, राजस्व और अन्य अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, समयबद्ध निर्णय से उन्हें बड़ी राहत मिल सकती है।

कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि जिलाधिकारी के जिले में आगमन के समय प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर जो उम्मीदें बनी थीं, उन्हें कायम रखने के लिए भूमि विवादों के निस्तारण पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि कार्रवाई का आधार शिकायतकर्ता या किसी राजनीतिक संबद्धता के बजाय अभिलेख, कानून और वास्तविक स्थिति होनी चाहिए।

अब नजूल भूमि की कार्रवाई के साथ लोगों की निगाह इस बात पर भी है कि आम नागरिकों की भूमि संबंधी शिकायतों के निस्तारण में प्रशासन किस तरह की समयबद्ध और समान प्रक्रिया अपनाता है। यदि सभी मामलों में पारदर्शी तरीके से सुनवाई और कार्रवाई होती है तो इससे प्रशासन और जनता के बीच विश्वास और मजबूत होने की उम्मीद है।

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