धारा लक्ष्य समाचार
सहारनपुर।
माँ शाकुंभरी विश्वविद्यालय, सहारनपुर में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) के प्रायोजन में “जलवायु समुत्थानशीलता, सूखा न्यूनीकरण एवं प्रौद्योगिकी-आधारित कृषि पद्धतियाँ” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न कृषि संबंधी चुनौतियों के समाधान, सूखा प्रबंधन, प्राकृतिक खेती तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. विमला वाई. ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रभावी आपदा प्रबंधन और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने फसल चक्र, मिश्रित खेती, मृदा परीक्षण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय कृषि को अधिक टिकाऊ,पर्यावरण-अनुकूल एवं लाभकारी बना सकता है।
प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचारों को प्रोत्साहित करने के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ किसानों तक पहुँचाना आवश्यक है। उन्होंने किसानों को नवीन तकनीकों के प्रति जागरूक एवं प्रशिक्षित करने तथा कृषि उत्पादन में सुधार के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
पद्मश्री सम्मानित प्रगतिशील किसान सेठपाल सिंह ने प्राकृतिक एवं संतुलित खेती, मृदा स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादन के महत्व पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने किसानों को अनावश्यक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियाँ अपनाने के लिए प्रेरित किया।
फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून के वैज्ञानिक डॉ. हुकुम सिंह ने जलवायु अनुकूल कृषि, मृदा में जैविक कार्बन की वृद्धि, उपयुक्त पौध प्रजातियों के चयन, कृषि विविधीकरण तथा कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जल संरक्षण, मृदा परीक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग को टिकाऊ कृषि के महत्वपूर्ण आधार बताया।
डॉ. मुर्तजा हसन ने कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय एवं सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. मनोज सिंह तथा डॉ. रविंद्र तोमर सिंह सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी कृषि तकनीकों, संसाधन प्रबंधन और किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुँचाने के विषय में अपने विचार साझा किए।
कार्यशाला में सूखा न्यूनीकरण, जल प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. विमला वाई. द्वारा डॉ. मनोज सिंह को सम्मानित किया गया।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार ने सतत कृषि विकास की दिशा में कार्यशाला को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
डॉ. पंकज कुमार ने कार्यशाला के उद्देश्य एवं महत्व की जानकारी देते हुए जलवायु परिवर्तन और कृषि में आधुनिक तकनीकों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। तकनीकि सत्र के बाद विशेषज्ञों ने श्रोताओं के सवालों का जवाब दिया I हर्ष ने तकनीकी सत्रों के सफल आयोजन के लिए सभी विशेषज्ञों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. सोमा दास द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार श्री कमल कृष्ण, उपकुसचिव अनूप कुमार, सहायक संजीव कुमार, प्रो. विनोद कुमार, डॉ. राजीव कौशिक, डॉ. आर.के. गुप्ता, डॉ. राजकुमार, डॉ. सुदर्शना मिश्रा, डॉ. सुरेंद्र कुमार, डॉ. संदीप कुमार, विश्वविद्यालय के सीईओ श्री अभिनव पुंडीर, डॉ. मितिका, डॉ. कोमल त्यागी, डॉ. ममता चौधरी, डॉ. निमितोष त्यागी, डॉ. अभिषेक शर्मा, रोशनी मोदी अभिषेक डॉ. अंकिता चौधरी, डॉ. प्रतिभा चौहान, डॉ. विजय प्रताप, एवं श्री सन्नी गिरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
