डिप्टी सीएम के निरीक्षण के बावजूद नहीं सुधर रही स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली, सीएचसी पर 16 में महज पांच कर्मचारी मिले मौजूद

डॉक्टरों पर बाहर की दवाइयां लिखने का आरोप, महज एक रुपये में पर्चा बनवाने वाले गरीब मरीज ने बयां की अपनी बेबसी

रिपोर्ट सुधीर शर्मा बाराबंकी

धारा लक्ष्य समाचार पत्र 

त्रिवेदीगंज, बाराबंकी। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक द्वारा जनपद बाराबंकी में समय-समय पर स्वास्थ्य सेवाओं का निरीक्षण किए जाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। इसका जीता-जागता उदाहरण विकासखंड त्रिवेदीगंज क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिवा एट शुम्भा में देखने को मिला, जहां कर्मचारियों की उपस्थिति और मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बुधवार को धारा लक्ष्य समाचार पत्र की टीम ने जब अस्पताल पहुंचकर व्यवस्थाओं की पड़ताल की तो विभागीय सूची में दर्ज 16 कर्मचारियों में से मौके पर महज पांच कर्मचारी ही मौजूद मिले। शेष कर्मचारियों की अनुपस्थिति को लेकर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। यदि निर्धारित ड्यूटी के दौरान कर्मचारी अस्पताल में मौजूद नहीं थे तो आखिर उनकी अनुपस्थिति में मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं कौन उपलब्ध करा रहा है? वहीं, अनुपस्थित कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है।

मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे एक मरीज के पर्चे पर बाहर से दवाइयां लिखे जाने का मामला भी सामने आया। आरोप है कि चिकित्सक डॉ. आकांक्षा त्रिपाठी द्वारा मरीज को बाहर की दवाइयां लिखी गईं।

आर्थिक रूप से कमजोर मरीज ने पत्रकारों को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उसके पास कुल दो रुपये थे, जिसमें एक रुपये का पर्चा बनवाया और एक रुपया ही शेष बचा। ऐसे में वह बाहर से दवाइयां कैसे खरीद पाएगा? गरीब मरीज की यह व्यथा सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के उन दावों पर सवाल खड़े करती है, जिनमें प्रत्येक जरूरतमंद को निःशुल्क एवं बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की बात कही जाती है।

मौके पर मौजूद मिले कर्मचारी

अस्पताल में उपलब्ध कराई गई कर्मचारियों की सूची के अनुसार अधीक्षक शशिकांत, डॉ. मद्धेशिया, डॉ. नम्रता वर्मा, डॉ. सदब तमन्ना, डॉ. आकांक्षा त्रिपाठी, डेंटल हाइजीनिस्ट राम स्वाभाऊ, पंकज कुमार धीमान (वार्ड बॉय), फार्मासिस्ट किशोर कुमार, प्रियंका गौतम (स्टाफ नर्स), सपना सिंह (स्टाफ नर्स), मंजू सिंह (बाबू), गीता यादव (नर्स), राकेश कुमार (लैब टेक्नीशियन), सफीकुन (सफाईकर्मी) और विनय (सफाई कर्मचारी) सहित कुल 15 नाम उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें मौके पर डॉ. आकांक्षा त्रिपाठी, राम स्वाभाऊ, पंकज कुमार धीमान, गीता यादव और राकेश कुमार की मौजूदगी बताई गई।

अब उठ रहे हैं ये सवाल

जब सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को बेहतर और सुलभ इलाज देने की जिम्मेदारी है, तो फिर मरीजों को बाहर की दवाइयां क्यों लिखी जा रही हैं? निर्धारित संख्या में कर्मचारी होने के बावजूद अस्पताल में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रही है? क्या स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी नियमित रूप से उपस्थिति और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की जांच करते हैं?

अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कार्रवाई करते हैं।

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