एआई और तकनीक से जनजातीय विकास को नई उड़ान।
जनजातीय भाषाओं में संवाद, स्वास्थ्य और शासन तक पहुंच हुई आसान।
नई दिल्ली। भारत सरकार जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास के लिए तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का व्यापक उपयोग कर रही है। जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा ने कहा कि “जनजातीय गरिमा उत्सव” के माध्यम से सरकार दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, रोजगार और डिजिटल सेवाएं पहुंचाने का कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि पीएम-जनमन, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और सिकल सेल उन्मूलन मिशन जैसी योजनाओं से देश के 63 हजार से अधिक गांवों के 5.5 करोड़ आदिवासी लाभान्वित हो रहे हैं।
सिकल सेल रोग के इलाज के लिए भारत की पहली स्वदेशी जीन थेरेपी “बिरसा 101” को बड़ी उपलब्धि बताते हुए उन्होंने कहा कि यह जनजातीय समाज के लिए आधुनिक विज्ञान का बड़ा उपहार है।
एआई आधारित “आदि वाणी” और “ट्राइबॉट” जैसे प्लेटफॉर्म आदिवासी भाषाओं में सरकारी योजनाओं की जानकारी और शिकायत निवारण की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं “ट्राइबएक्स” और जीआई आधारित डिजिटल एटलस जनजातीय कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने में मदद करेंगे।
लेख में कहा गया है कि तकनीक अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि जनजातीय गरिमा, सांस्कृतिक संरक्षण और विकसित भारत के निर्माण का सशक्त माध्यम बन चुकी है।
