शेखपुर समोधा से मदाखेड़ा बॉर्डर तक सड़क बनी जानलेवा, 80 से अधिक गड्ढों से राहगीरों की बढ़ी मुश्किलें।

बरसात में सड़क और गड्ढों का अंतर मिटा, रोजाना हजारों वाहन चालक और स्कूली बच्चे जोखिम उठाने को मजबूर।

रिपोर्टर: रोहित मिश्रा रायबरेली

धारा लक्ष्य समाचार पत्र

बछरावां, रायबरेली।विकास क्षेत्र बछरावां का प्रमुख शेखपुर समोधा-मदाखेड़ा मार्ग इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। शेखपुर समोधा बाईपास चौराहे से लेकर मदाखेड़ा बॉर्डर तक करीब 7 से 8 किलोमीटर लंबी सड़क जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। सड़क की जर्जर हालत के कारण प्रतिदिन हजारों वाहन चालकों, राहगीरों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग पर 70 से 80 से अधिक छोटे-बड़े गड्ढे बन चुके हैं,

जिनके कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। यह सड़क रायबरेली समेत कई जनपदों को औद्योगिक नगरी कानपुर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसी वजह से यहां दिन-रात भारी और हल्के वाहनों का आवागमन बना रहता है।

बताया जाता है कि इस मार्ग से गोरखपुर, बाराबंकी, सुल्तानपुर, जौनपुर, अंबेडकर नगर, बस्ती, गोंडा, सिद्धार्थनगर, देवरिया सहित कई जिलों के वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं। लेकिन सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहन चालकों को हर समय हादसे का डर बना रहता है। कई बार दोपहिया वाहन चालक गड्ढों में फिसलकर घायल हो चुके हैं, जबकि ई-रिक्शा और अन्य छोटे वाहन भी गहरे गड्ढों में फंस जाते हैं।

बरसात के मौसम ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बारिश का पानी गड्ढों में भर जाने से सड़क पूरी तरह जलमग्न दिखाई देती है और वाहन चालकों को यह समझ नहीं आता कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। ऐसे में दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरना पड़ रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत न होने से समस्या लगातार विकराल रूप धारण करती जा रही है।

क्षेत्रवासियों ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से मांग की है कि सड़क पर बने जानलेवा गड्ढों की तत्काल मरम्मत कराई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क को दुरुस्त नहीं कराया गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समस्या का समाधान न होने पर जनआंदोलन भी किया जा सकता है।

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